6 लाख रुपए वेतन और 15 हजार रुपए रिश्वत:सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल सहित तीन लेक्चरर ने बाबू से 72 हजार रुपए का बिल पास करने के एवज में मांगी थी रिश्वत
6 लाख रुपए वेतन और 15 हजार रुपए रिश्वत:सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल सहित तीन लेक्चरर ने बाबू से 72 हजार रुपए का बिल पास करने के एवज में मांगी थी रिश्वत
अलवर में बीबीरानी के सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल सहित तीन लेक्चरर को एसीबी ने 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए मंगलवार को गिरफ्त में लिया है। जिन्होंने कॉलेज के साहयक प्रशासनिक अधिकारी से 72 हजार रुपए का बिल पास करने के एवज में रिश्वत ली। खास बात यह है कि दो प्रोफेसर की मासिक तनख्वाह 2 लाख 47 हजार है। मतलब दोनों को महीने के 5 लाख रुपए मिलते हैं। तीसरे लेक्चरर का फिक्सेशन नहीं होने से फिलहाल 50 हजार रुपए वेतन मिल रहा है। मतलब तीनों कुल करीब 6 लाख रुपए से अधिक का वेतन उठा रहे थे।
एसीबी के एएसपी विजय सिंह ने बताया कि कॉलेज में कार्यवाहक प्रिंसिपल इतिहास आचार्य एसएन बैरवा निवासी टांकाहेड़ी रोड किशनगढ़बास, लेक्चरर व सह आचार्य भूगोल दीपक अहलावत निवासी सेक्टर 22 गुरुग्राम व हिंदी व्याख्याता एवं प्रभारी एनएसएस आरसी शर्मा ने कॉलेज के ही सहायक प्रशासनिक अधिकारी हीरालाल यादव से रिश्वत मांगी थी। असल में कॉलेज में 21 से 27 मार्च तक एनएसएस के लगाया गया। जिसमें नाश्ता, भोजन, स्टेशनी व अन्य सामान पर 72 हजार रुपए खर्च करना बताया गया। जिसका बिल पास करने के एवज में तीनों ने 15 हजार रुपए रिश्वत मांगी गई थी। सहायिक प्रशासनिक अधिकारी ने एसीबी को शिकायत दी। जिसकी 31 मार्च को पुष्टि होने के बाद एसीबी ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों को कॉलेज के अंदर ही रिश्वत के 15 हजार रुपए लेने के बाद पकड़ा गया। तीनों ने 5-5 हजार रुपए की रिश्वत ली थी। एसीबी के एएसपी विजय सिंह के निर्देशन में निरीक्षक प्रेमचंद सहित स्टाफ ने ट्रैप की कार्यवाही को अंजाम दिया।
2 लाख रुपए एक का वेतन
एसीबी ने बताया कि कॉलेज के लेक्चरर की औसतन 2 लाख रुपए महीने का वेतन है। प्रिंसिपल व सीनियर लेक्चरर की इससे अधिक भी हो सकती है। मतलब तीनों का एक महीने क करीब 5 से 6 लाख रुपए वेतन बनता है। जो कॉलेज के बाबू से 15 हजार रुपए रिश्वत मांग रहे थे। मतलब शिविर में पैसा कम खर्च करो। बिल ज्यादा का पास करो। कुछ पैसा खुद बचाओ। कुछ दूसरा बचाए। यह खेल बाबू का हजम नहीं हुआ। उसने एसीबी को शिकायत कर पूरा खेल बिगाड़ दिया।
बाबू की तारीफ हो रही
इस पूरे मामले में कॉलेज के बाबू की खूब तारीफ हो रही है। असल में बाबू ने कॉलेज के भ्रष्ट नटवर्क को तोड़ने का काम किया है। इस कारण उनके साहस की प्रशंसा खूब है। एसीबी को यह भी पता चला है कि इस तरह का खेल अधिकतर कॉलेजों में होता है। लेकिन शिकायत नहीं मिलने से कार्यवाही नहीं हो पाती है। ऐसी एक भी कार्यवाही से भ्रष्टाचार पर काफी लगाम लगती है।



Comments
Post a Comment