राजस्थान की 58 फीसदी शराब की दुकान बंद:13 फीसदी दुकानदारों ने न लाइसेंस रिन्यू करवाया और न ऑक्शन में खरीदी, रेवेन्यू पर संकट

 

राजस्थान की 58 फीसदी शराब की दुकान बंद:13 फीसदी दुकानदारों ने न लाइसेंस रिन्यू करवाया और न ऑक्शन में खरीदी, रेवेन्यू पर संकट



राजस्थान में दो साल पहले तक जहां शराब की दुकान लेने के लिए मारा-मारी होती थी, वहीं अब इन्हें कोई लेने को तैयार नहीं है। इसके पीछे कारण सरकारी आबकारी पॉलिसी और ई-ऑक्शन है। यही कारण है कि शराब बेचने का टारगेट पूरा नहीं होने पर लगने वाली भारी पेनाल्टी से बचने के लिए ठेकेदारों को मजबूरन सस्ती या डिस्काउंट रेट पर शराब बेचनी पड़ी।

दरअसल, सरकार ने इस साल 2022-23 में शराब बेचने, लाइसेंस फीस समेत अन्य पेटे से 15 हजार करोड़ रुपए के रेवेन्यू का टारगेट रखा है। ऐसे में शराब के ठेके अगर खाली रहे तो इसका नुकसान सरकार के कोष पर भी पड़ सकता है। राजस्थान में शराब के वर्तमान में 7664 ठेकों के लाइसेंस सरकार देती है। नए फाइनेंशियल ईयर यानी एक अप्रैल से इनके लाइसेंस वैलिड होते है। लेकिन, सरकार की पॉलिसी की वजह से 58 फीसदी यानी करीब 4483 शराब की दुकान इस बार नहीं खुली। सरकार ने पुराने ठेकेदारों को भी ऑप्शन दिया था कि वे अगले 2 साल के लिए लाइसेंस रिन्यू कर देंगे लेकिन 5 हजार 164 दुकानदारों ने लाइसेंस दोबारा रिन्यू नहीं करवाया।


नीलामी में 13 फीसदी भी दुकानें नहीं बिकी
आबकारी विभाग ने लाइसेंस रिन्यू नहीं होने के बाद 5164 दुकानों को 22 से 30 मार्च तक नीलामी के जरिए बेचने का निर्णय किया। इसके लिए ऑनलाइन बोली लगाई गई, लेकिन इसमें भी केवल 680 दुकान ही बोली में लोगों ने खरीदी। आबकारी कमिश्नर चेतनराम देवड़ा ने बताया कि जिन दुकानों का ऑक्शन नहीं हुआ है उन्हें अप्रैल में फिर से ऑनलाइन ऑक्शन लगाकर बेचने का प्रयास किया जाएगा।

डूंगरपुर में सबसे ज्यादा और झुंझुनूं में सबसे कम खुलेगी दुकानें
जिलेवार दुकानों की स्थिति देखे तो डूंगरपुर जिले में 50 में से 45 दुकान ही खुली है। 5 दुकानों की खरीद के लिए कोई नहीं आया। इधर, झुंझुनूं जिले में 335 दुकानों में से केवल 70 दुकानें ही खुलेगी, जबकि 265 दुकानों को कोई खरीददार नहीं मिला, यहां केवल 21 फीसदी ही दुकान खुली है।

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