2 करोड़ सैलेरी, 2 क्लास भी नहीं लेते लेक्चरर:अलवर के आर्ट्स कॉलेज में 92 लेक्चरर, स्टूडेंट्स मायूस, प्रिंसिपल बोलीं- गर्मी ज्यादा है

 

2 करोड़ सैलेरी, 2 क्लास भी नहीं लेते लेक्चरर:अलवर के आर्ट्स कॉलेज में 92 लेक्चरर, स्टूडेंट्स मायूस, प्रिंसिपल बोलीं- गर्मी ज्यादा है ।



अलवर के बीबीरानी राजकीय कॉलेज के प्राचार्य सहित दो लेक्चरर 15 हजार रुपए की रिश्वत के मामले में पकड़े गए। इसके बाद दैनिक भास्कर ने प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी कॉलेजों में शुमार अलवर के आर्ट्स कॉलेज का निरीक्षण किया तो चौंकाने वाली बातें सामने आई। यहां 92 लेक्चरर हैं। जिनको सरकार हर महीने 2 करोड़ रुपए सैलरी देती है। करीब 10 से 15 लेक्चरर ऐसे हैं जिनका वेतन पौने 3 लाख रुपए प्रति माह है।



बता दें कि अलवर के बाबू शोभाराम कॉलेज में करीब 6 हजार स्टूडेंट पढ़ता हैं। सेशल चल रहा है। सुबह 9 से शाम 5 बजे तक क्लास लगने का समय होता है। लेकिन कक्षाएं न के बराबर लग रही हैं। इन दिनों कॉलेज के 92 लेक्चरर रोजाना 2 से 5 क्लास भी नहीं ले पाते हैं। जबकि रोजाना करीब 200 से अधिक क्लास लगनी चाहिए। मतलब कॉलेजों में लेक्चरर को कलक्टर से करीब दो गुना तक सैलरी मिलने के बावजूद एक क्लास नहीं लेते हैं। भास्कर की टीम ने दोपहर 12 से 2 बजे तक कॉलेज में रहकर क्लास का मुआयना किया। एक भी क्लास नहीं लगी मिली। हालांकि भूगोल, अंग्रेजी व राजनीति विज्ञान के लेक्चरर ने कहा कि उन्होंने सुबह के समय एक-एक क्लास ली है। बाकी कक्षों में धूल जमी मिली है। कई जगह कमरों में कचरा तक पड़ा था। ये हाल तो प्राचार्य के कक्ष के आसपास के वाले कक्षा कक्षों का मिला है। जबकि कॉलेज कैंपस बहुत बड़ा है।

स्टूडेंट बोले कोई नहीं लेता क्लास
सैकंड ईयर के स्टूडेंट ने कहा कि कोई क्लास नहीं लगती है। हम पढ़ना भी चाहते हैं। लेकिन टीचर ही ऐसे ही हैं। मतलब माहौल ही नहीं है पढ़ने का। कुछ स्टूडेंट्स खेलने आते हैं। वापस चले जाते हैं। अब फॉर्म जमा कराने आए हैं। यहां भी वेटिंग है। जबकि भीड़ नहीं है। मतलब किसी काम को समय पर करने का माहौल नहीं है।

आर्ट्स कॉलेज में दोपहर 12 बजे इस तरह का सन्नाटा।
आर्ट्स कॉलेज में दोपहर 12 बजे इस तरह का सन्नाटा।

टीचर मिले तो बोले दूसरे काम
यहां प्रो रमेश बैरवा मिले। उन्होंने कहा कि देखिए, लेक्चरर सबस एक जैसे नहीं है। कुछ पढ़ाते हैं। कुछ बचते भी हैं। लेकिन लेक्चरर को टीचिंग के अलावा नॉन टीचिंग वर्क ज्यादा दिया होता है। इस कारण लेक्चरर उस काम में लग जाते हैं। स्टूडेंट्स को कॉलेज में आना चाहिए। ताकि लेक्चरर पर पढ़ाने का दबाव बने। यह सही है कि सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई कम हो गई है। जो चिंताजनक है।

अब सुनिए प्राचार्य को
कॉलेज प्राचार्य लवलीना शर्मा ने कहा कि अभी एग्जाम फॉर्म भरने का समय है। इससे पहले कोविड के कारण सब बंद था। लेक्चरर क्लास लेते हैं। स्टूडेंट्स ही कम आने लगे हैं। फिर भी हम अधिक से अधिक क्लास लेने की तैयारी रखते हैं। यह बात सही है कि इन दिनों क्लास कम लगी हैं। हमारे पास दूसरे काम भी हैं। जैसे इन दिनों मुझे बर्डोदा मेव में कॉलेज जमीन आवंटित कराने का जिम्मा दिया हुआ है। मैं वहां के तहसीलदार सहित अन्य अधिकारियों के सम्पर्क में हूं। ताकि उस काम को भी समय पर किया जा सके।

अलवर के आर्ट्स कॉलेज का मुख्य गेट।
अलवर के आर्ट्स कॉलेज का मुख्य गेट।

एएओ ने दी जानकारी
आर्ट्स कॉलेज के एएओ ने बताया कि कॉलेज में 92 लेक्चरर हैं। जिनको करीब महीने की 2 करोड़ रुपए वेतन मिलता है। इनमे कई पौने 3 लाख रुपए महीने का वेतन लेने वाले भी हैं। वहीं कलेक्ट्रेट से मालूम किया तब पता चला कि कलक्टर का वेतन भी डेढ़ से 2 लाख के आसपास ही है।


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