जयपुर: कामयाब बिजनेसवुमन बनना चाहती थी दोनों बहनें ।। ऑनलाइन मदद से लखनऊ पहुंची
लखनऊ में पेस्ट कंट्रोल दवा बेचती मिलीं लापता बहनें:
पर्ची डालकर शहर सिलेक्ट किया, घर ढूंढने से लेकर जॉब तक की इंफोर्मेशन ऑनलाइन जुटाई
जयपुर के करतारपुरा स्थित स्कूल से एडवोकेट अवधेश कुमार की लापता हुई दो सगी बेटियां बुधवार को लखनऊ में मिल गई हैं। दोनों सगी बहनें भावना और रमा कंवर 56 दिन बाद लखनऊ के गुडंबा इलाके में मिलीं। दोनों लखनऊ में एक कंपनी के लिए मार्केटिंग का काम कर रही थी। बच्चियों से पूछताछ में सामने आया है कि सक्सेसफुल बिजनेसपर्सन बनने के लिए उन्होंने घर छोड़ा था। इन बच्चियों की तलाश न करने का आरोप लगाते हुए वकीलों ने 21 मार्च को हाईकोर्ट के सामने और कलेक्ट्रेट सर्किल पर प्रदर्शन किया था। लापता बहनाें की तलाश के लिए डीजीपी एमएल लाठर ने एडिशनल कमिश्नर अजयपाल लांबा के नेतृत्व में 32 अफसरों की टीम बनाई थी।
दरअसल, 3 फरवरी को पिता ने दोनों बच्चियों को स्कूल छोड़ा था। जहां से बीमार होने का बहाना करके दोनों स्कूल से निकलीं और मोबाइल स्विच ऑफ कर ट्रेन से लखनऊ पहुंच गईं।
4 दिन पीजी में रहीं फिर नौकरी जॉइन की
बच्चियों ने तमिलनाडु, मुम्बई और लखनऊ की पर्ची डाली थी। लखनऊ की पर्ची निकलने पर वहां से लिए रवाना हो गई। ट्रेन से बिना टिकट लखनऊ पहुंचीं। 4 दिन पीजी में रहींं फिर जॉब ढूंढा कंपनी के फ्लैट में रहने लगीं।
दोनों ने लखनऊ में ऑटो वाले के मोबाइल से जयपुर में टीचर को फोन किया। दादी की बीमारी बताकर 30 हजार रुपए मांगे। ट्रेस की भनक लगी तो मोबाइल फेंक दिया। ऑटो वाले का नंबर ट्रेस होने के बाद पुलिस लखनऊ पहुंच गई। लखनऊ स्टेशन के पास ऑटो में बैठने और एक पीजी में जाने की फुटेज मिलीं।
21 मार्च को गुडंबा इलाके में सीसीटीवी फुटेज आया, इसमें बच्ची एक पेस्ट कंट्रोल प्रोडेक्ट की मार्केटिंग करती दिखीं। बच्चियों की तलाश के लिए एडिशनल कमिश्नर अजयपाल लांबा के पेज पर अपील पोस्ट की गई। इस पर वॉट्सएप नंबर पर क्लिक करते ही बच्चियों की फोटो और जानकारी यूजर के नंबर पर ऑटोमैटिक चली जाती थी।
200 जवानों ने 72 घंटे सर्च किया
डीसीपी साउथ मृदुल कच्छावा ने बताया कि सर्च ऑपरेशन में जयपुर और लखनऊ के 200 पुलिसकर्मी 72 घंटे तक लगे रहे। मार्केटिंग कंपनी का ऑफिस तलाश कर बच्चियों को ढूंढ निकाला। दोनों कंपनी के फ्लैट में ही रह रही थीं।
मुम्बई जाने की कर चुकी हैं कोशिश
भास्कर ने साइबर एक्सपर्ट के साथ खंगाली इंटरनेट सर्च हिस्ट्री में बच्चियां सितम्बर से घर से जाने की तैयारी कर रही थीं। नवम्बर में एक बार घर से स्टेशन पहुंच भी गईं, लेकिन मुम्बई का टिकट नहीं मिला तो लौट आई। बच्चियों की 6 माह पुरानी इंटरनेट सर्च हिस्ट्री खंगाली। इस दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। बच्चियों ने बताया कि वह सफल बिजनेस पर्सन बनना चाहती थीं।
वह करीब 6 महीने से ऑनलाइन आर्टिकल पढ़ रही थीं। इस बीच उन्होंने फैशन से संबंधित आइडिया का प्रजेंटेशन आईआईटी मुम्बई की एंटरप्रेन्योरशिप सेल को भेजा था। इस तरह की बातें भी उनकी नोटबुक में भी मिली हैं। दोनों 23 नवम्बर को घर से निकलकर रेलवे स्टेशन पहुंच गई थी, जहां पर मुम्बई की टिकट नहीं मिलने के कारण घर लौट आई थीं।
टैरो कार्ड रीडर से ऑनलाइन पूछकर दिनचर्या की शुरुआत करती थीं।
ऑनलाइन जुटाई गई जानकारी कर रहीं थी फॉलो
बच्चियों ने मनीटेमर और यू-ट्यूब से अनजान शहर में बिना पैसे और मोबाइल के कैसे रहें? कहां सेफ रह सकते हैं? कहां खाना मिलेगा? जरूरत पड़ने पर किन लोगों से मदद मांगी जा सकती है? जॉब करके पैसे कमाए जा सकते हैं। लखनऊ पहुंचने के बाद वह पीजी छोड़कर स्टेप बाय स्टेप चल रही थी।
फेक आईडी का यूज किया
दोनों ने पहचान बदलने के लिए आधार कार्ड नंबर में भी बदलाव की कोशिश की। मेक माय ट्रिप पर अकाउंट बनाकर ट्रेन सर्च की। जाने से पहले इंटरनेट सर्च हिस्ट्री डिलीट करने की के लिए भी वीडियो से जानकारी सर्च की। इंस्टाग्राम, एफबी व अन्य प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग लड़कियों के नाम से अकाउंट बना रखे थे।





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