भिवाड़ी: कचरे के ढेर पर विद्या का मंदिर:डंपिंग यार्ड के बीचों-बीच बना हैं नयागांव का राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल, नामांकन 221 का अध्यापक एक भी नहीं
कचरे के ढेर पर विद्या का मंदिर:डंपिंग यार्ड के बीचों-बीच बना हैं नयागांव का राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल, नामांकन 221 का अध्यापक एक भी नहीं
भिवाड़ी राजस्थान का सबसे बड़ा औद्योगिक एरिया है। भिवाड़ी से राज्य सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 40 से 45 प्रतिशत का रेवेन्यू जाता है, भिवाड़ी को नगर परिषद बने कई वर्ष बीत चुके हैं। यहां पर बीड़ा कार्यालय सहित पुलिस जिला मुख्यालय भी है।
तमाम आला अधिकारी यहां पर बैठते हैं लेकिन इन सबके बीच भिवाड़ी का विकास ना के बराबर ही है।भिवाड़ी में अधिकारियों से लेकर राजनीतिक नेताओं के द्वारा विकास कराने के झूठे वादे आए दिन भिवाड़ी की जनता को मिल रहे हैं।
दैनिक भास्कर की टीम ने मंगलवार को भिवाड़ी के वार्ड नंबर 65 में पड़ने वाले नया गांव का दौरा किया जहां पर देखा गया कि आम आदमी की तो बात छोड़िए देश का भविष्य कहे जाने वाले नन्हे मुन्ने बच्चे डंपिंग यार्ड के बीच में बने राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में कूड़े के ढेर पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं।
यहां पर गंदगी इतनी है की एक पल भी रुका नहीं जाए, लेकिन बच्चों की मजबूरी देखिए कि उस कूड़े के ढेर पर पढ़ने के लिए यहां के आला अधिकारियों ने उनको मजबूर कर रखा है।
भिवाड़ी का पूरा कचरा विद्यालय के इर्द गिर्द दीवार से सटाकर गेरा जा रहा है।और नन्हे मुन्ने बच्चे रोजाना उन्हीं कचरों के ढेर पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं, आलम यह है कि विद्यालय में ना पीने के पानी की व्यवस्था है और ना ही बैठने के लिए पर्याप्त कमरे हैं चारों तरफ सड़ा गला कचरा पड़ा हुआ है।
शिक्षा विभाग की अंधेर गर्दी इतनी है कि विद्यालय में एक भी अध्यापक की नियुक्ति नहीं है। विद्यालय के अंदर एक अध्यापक को डेपुटेशन पर लगा रखा है।
विद्यालय के अंदर कक्षा 1 से 6 तक 221 बच्चों का नामांकन है,नामांकन को देखते हुए राज्य सरकार ने यहां पर प्रधानाध्यापक सहित कुल 11 अध्यापकों के पद स्वीकृत किए हैं लेकिन वर्तमान में कार्यरत एक भी नहीं है।
कूड़े की वजह से दिनभर मक्खी मच्छरों का आलम रहता है,असामाजिक तत्व विद्यालय की छुट्टी के बाद विद्यालय परिसर में मांस व मदिरा का सेवन करते हैं। इतने बड़े औद्योगिक एरिया में नन्हे-मुन्ने बच्चों की पढ़ाई के प्रति प्रशासनिक अधिकारियों की इतनी घोर लापरवाही सोचने का विषय है।




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